नमक, तेल, मसाले, सिरका अथवा क्लास - 2 परिरक्षक (सोडियम बैंज़ोयेट ) द्वारा समूल अथवा टुकड़ों में फल एवं सब्ज़ियों को परिरक्षित करने की विधि को अचार बनाना या पिकलिंग कहते है एवं तैयार उत्पाद को अचार कहते है ।
अचार से होने वाले
मुख्य लाभ इस प्रकार हैं :
1.
अचार स्वादिष्ट होता है एवं भूख में
वृद्धि करता है ।
2.
अचार आहार को विविधता प्रदान करता है
।
3.
अचार फलन के ऋतु के अतिरिक्त भी
परिरक्षित रूप में फल एवं सब्जियाँ तथा उनमें विद्यमान पौष्टिक तत्व उपलब्ध रहते
हैं ।
4.
फलन के समय में बाज़ार में माँग से अधिक होने के कारण, फल एवं सब्ज़ियों की दर में कमी आ जाती है । ऐसे समय में फल एवं
सब्ज़ियों को क्रय कर परिरक्षित किया जाता है एवं फलन की ऋतु के अतिरिक्त इन्हें
अधिक दर पर विक्रय कर आर्थिक लाभ लिया जाता है ।
फलों का अचार :
तेल युक्त आम का
अचार:
सामग्री:
कच्चे आम के टुकडे 1 कि.ग्रा., नमक 250 ग्राम, हल्दी 20 ग्राम, मैथी50 ग्राम, कलौंजी 20 ग्राम, ज़ीरा 10 ग्राम, काली मिर्च 10 ग्राम, लाल मिर्च 8 ग्राम, हींग 2 ग्राम, सौंफ 25 ग्राम एवं सरसों का तेल 400
मिली.।
फलों का अचार
बनाने कि विधि:
1.
जालीदार, सफेद, खट्टे, दाग रहित, कीट एवं रोग रहित, सम्पूर्ण कच्चे आम का चुनाव करें ।
2.
आम को धो कर समान आकार में, धुले एवं
सूखे चाकू से काट कर गुठली हटायें ।
3.
आम के टुकड़ों में नमक लगाकर निर्जमीकृत (सूक्षम्जीवों से
रहित) बरनी (चौड़े मुँह की बोतल अथवा बरनी) में भर कर बरनी के मुँह पर स्वच्छ एवं
सूखा हल्का कपड़ा बाँध कर 4 दिन धूप में रखें ।
4.
आम के टुकडों को बरनी से निकालकर, साफ कपडे़ पर फैलाकर धूप में 1 से 2
घंटे तक स्टेनलैस तथा नमक युक्त जल को अलग
कर दें ।
5.
मेथी, कलौंजी तथा सौंफ को मोटा पीसें ।
अन्य मसालों को बारीक पीसें । इन सभी मसालों
की कुल मात्रा के एक तिहाई हिस्से में
मिलायें । बारीक़ पिसे नमक को मसाले युक्त आम के टुकड़ों में मिला कर बरनी
में दबा कर भरें । तत्पश्चात् बरनी के मुँह तक तेल की शेष मात्रा भरें ताकि आम के
सभी टुकड़े तेल में डूब जायें । पन्द्रह से बीस दिन बाद आम का अचार खाने योग्य हो
जायेगा।
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