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आहार

Thursday, 16 April 2026

स्क्वैश, कार्डियल, बार्ली वाटर, नेक्टर एवं कृत्रिम शर्बत

 भारत मूलतः गर्म प्रदेश है । राष्ट्र का अधिकतर भाग वर्ष में छह से सात माह तक गर्म रहता है । अधिक तापमान में रहने वाले लोगों को ठंडक पहुँचाने हेतु शीतल पेय पदार्थ अहम भूमिका निभाते हैं । व्यवसाय के रूप में अपनाने हेतु भी पेय पदार्थ निर्माण एक उपयुक्त उद्योग के रूप में अपनाया जा सकता है।

स्क्वैश (शर्बत)

फलों के रस, जल तथा शक्कर मिश्रित कर निर्मित उत्पाद जिसमें 33 प्रतिशत रस, 55 प्रतिशत शक्कर, 10-11 प्रतिशत जल तथा 1 से 2 प्रतिशत सिट्रिक अम्ल उपस्थित होता है । शर्बत को परिरक्षित करने के लिये पोटैशियम-मैटा-बाय-सल्फाईट अथवा कुछ शर्बतों में सोडियम बैंज़ोयेट तथा शर्बत को आकर्षक बनाने हेतु खाने योग्य (अनुशंसित) अनुशंसित रंग  मिश्रित करते हैं ।

संतरे का शर्बत

सामग्री:

संतरे का रस 1 लीटर, शक्कर 1.5 कि.ग्राम, सिट्रिक अम्ल 25 ग्राम, स्वच्छ जल 750 मि.ली., पोटैशियम-मैटा-बाय-सल्फाईट 2 ग्राम एवं खाने का नारंगी अनुशंसित रंग , आवश्यकतानुसार 

1. दाग, धब्ब, कीट एवं रोग रहित सम्पूर्ण ताज़े , के तथा रसीले अथवा मौसमी का चुनाव करें ।

2. संतरे को बहते हुये पीने योग्य जल से अच्छी  प्रकार से धोयें ।

3. संतरे को साफ धुले हुये स्टेनलैस स्टील के चाकू से दो भाग में काँटें  तथा ज्यूसर द्वारा रस प्राप्त करें ।

4. संतरे को अधिक न दबायें अन्यथा छिल्कों से तेल निकल कर रस में मिश्रित हो रस को कड़वापन प्रदान करेंगे । यदि रस विद्युतचलित ज्यूसर द्वारा प्राप्त करें तो रस निकालने के पहले संतरों को छीलें कर तथा बीज एवं  रेशे हटायें । रस को मलमल के स्वच्छ एवं सूखे कपड़े की दो पर्त बनाकर छानें ।

5. उपरोक्त कपड़े को अच्छे डिटर्जेंट से धोने के उपरान्त ही रस छानने के लिये उपयोग में लायें ।

6. स्टेनलैस स्टील के भगोने में निर्धारित मात्रा में शक्कर तथा पीने योग्य जल को घी  मी आँच पर रखें ।  चाशनी बनाते समय चाशनी को घी  रे-घी  रे चलाते रहें ।

7. चाशनी  में निर्धारित मात्रा में सिट्रिक अम्ल या एक नींबू का रस मिश्रित करें । इसके प्रभाव से चाशनी  के सतह पर झाग के रूप में एकत्रित गंदगी (स्कम) को साफ धुले चम्मच द्वारा निकालें ।

8. एक तार की चाशनी बनायें ।

9. मलमल के स्वच्छ एवं सूखे कपड़े की पर्त बनाकर चाशनी को गर्म ही छान लें ।

10. छने हुये  रस के एक भाग को गुनगुनी चाशनी में मिलायें ।

11. मिश्रण में दो चुटकी पोटेशियम-मैटा-बाय-सल्फाईट एवं अनुशंसित खाने योग्य अनुशंसित रंग  की निर्धारित मात्रा मिश्रित करें ।

12. इस मिश्रण को शेष रस के साथ अच्छे प्रकार से मिश्रित कर संतरे का शर्बत तैयार पायें ।

शर्बत को बोतल में भरने हेतु सावधानियाँ : 

1. बोतलों को जैली की बोतलों की तरह ही निर्जमीकृत करें ।

2. जैली तथा जैम हेतु चौड़े मुँह के बोतलों का उपयोग करें, जबकि पेय पदार्थो हेतु संकरे मुँह के बोतल का प्रयोग करें ।

3. बोतल के मुँह  के ओर आधा इंच स्थान छोड़ते हुये  शर्बत भरें ।

4. बोतल के मुँह को बंद करने के उपयोग में लाये जाने वाले कॉर्क को, बोतलों की तरह ही जल मे उबालकर निर्जमीकृत करें ।

5. निर्जमीकृत कॉर्क द्वारा भरी हुई बोतलों का मुँह  बंद कर कॉर्क के ऊपर मोम लगाये जिससे बोतल पूर्णतः वायुरूद्ध हो जाये ।

6. पूर्व से तैयार लेबल, बोतल पर चिपकायें तथा शर्बत तैयार पायें ।

नींबू का शर्बत:

सामग्री

रस 1 लीटर, 2 किलो, जल 750 मिली एवं पोटेशियम-मैटा-बाय-सल्फाईट 2 ग्रा.।

नींबू का शर्बत बनाने कि विधि: 

1. पतले छिल्कों वाले कगज़ी  नींबू का उपयोग नींबू के शर्बत के लिये करें ।

2. नींबू  का शर्बत बनाने कि शेष विधि संतरे का शर्बत तैयार करने की विधि के समान है ।

चकोतरे का शर्बत:

सामग्री:

\रस 1 लीटर, शक्कर 1.5 कि.ग्रा., सिट्रिक अम्ल 25 ग्राम अथवा नींबू का रस, जल 750 मिली एवं पोटैशियम-मैटाबाय-सल्फाईट 2 ग्राम ।

चकोतरे का शर्बत बनाने कि विधि:

चकोतरे का शर्बत, संतरे के शर्बत की तरह ही तैयार करें ।

आम का शर्बत:

सामग्री:

आम का रस 1 लीटर, शक्कर 1 कि.ग्रा., सिट्रिक अम्ल 15 ग्राम अथवा 15 नींबू का रस, जल 1 लीटर, पोटैशियम-मेटा-बाय -सल्फाईट 2 ग्राम एवं खाने का नारंगी अनुशंसित रंग  आवश्यकतानुसार ।

आम का शर्बत बनाने किविधि:

1. चूस कर खाये जाने वाली पके, रसीले तथा कम रेशे वाली आम की प्रजातियों के फल शर्बत बनाने के हेतु उपयोग में लें ।

2. संतरे के शर्बत की विधि ही अपनायें ।

अनन्नास का शर्बत

सामग्री:

रस 1 लीटर, शक्कर 1.750 कि.ग्राम, सिट्रिक अम्ल 25 ग्राम अथवा 25 नींबू का रस, जल 750 मि.ली., पोटैशियम-मेटा-बाय -सल्फाईट 2 ग्राम एवं पीला अनुशंसित रंग  आवश्यकतानुसार ।

अनन्नास का शर्बत विधि :

पके हुये  रसीले फल लें स्टेनलैस स्टील के चाकू से छोटे-छोटे टुकड़ो में काटें एवं ज्यूसर द्वारा रस प्राप्त करें। शेष विधि संतरे के शर्बत की तरह अपनायें । 

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