सिट्रस (संतरा) जाति के फलों की निश्चित मात्रा में रस अथवा गूदे में शक्कर एवं सिट्रिक अम्ल को निश्चित समय तक उबाल कर उत्पाद में पूर्व से तैयार छिल्के के पतले टुकड़ों को 40 पी.पी.एम. (एक किलो में दो चुटकी), परिरक्षक, फलानुसार अनुशंसित रंग एवं एसेंस मिश्रित कर तैयार किया गया स्वादिष्ट मुलायम चमकदार पारदर्शी उत्पाद है ।
मार्मलेड के प्रकार :
1. जैम मार्मलेड :
2. जैली मार्मलेड :
इस उत्पाद को जैली में फल के छिल्के डालकर तैयार किया जाता है ।
सामग्री :
फल का रस अथवा गूदा 1 किलो ग्राम, शक्कर 1 किलो ग्राम, फल के पतले छिल्के आवश्यकता अनुसार, पोटैशियम-मैटा-बायसल्फाईट प्रति किलो दो चुटकी (40 पी.पी.एम.), नारंगी अनुशंसित रंग एवं एसेंस आवश्यकतानुसार ।
विधि :
जैम मार्मलेड व जैली मार्मलेड कि निर्माण विधि जैली के निर्माण की विधि की तरह ही है । इनके निर्माण में भिन्नता मात्र निम्नलिखित है:
1. इनका निर्माण केवल नींबू वर्गीय फलों के द्वारा किया जाता है ।
2. संतरे के छिल्के के अंदरूनी भाग में उपस्थित सफेद भाग, रेशे व बीज, मलमल के कपड़े में बाँध कर पोटली बना लें । संतरे के फाँकों को कुचलने के उपरांत, उबालते समय यह पोटली उबलते हुये रस एवं गूदे में डुबाकर रखें तथा 15 मिनट बाद यह पोटली निचोड़ कर अलग कर लें । पोटली से फल का अर्क निकाल कर मार्मलेड को एक विशेष प्रकार का स्वाद (संतरे की कड़वाहट का स्वाद) प्रदान करता है ।
3. रस या गूदे में शक्कर मिलाने के उपरांत, रस या गूदे को चम्मच से गिराने पर तार अथवा धागे बनने पर, पूर्व से तैयार छिल्के के छोटे टुकडों एवं सिट्रिक अम्ल मिलायें ।
4. छिल्के तैयार करने के लिये छिल्कों को साफ करें, भीतर के सफेद हिस्से को हटायें । छिल्कों को छोटे व पतले आकार में काट कर 15 मिनट तक, एक बार जल परिवर्तित कर उबाल लें ताकि छिल्कों की कड़वाहट दूर हो सके।
मार्मलेड के निर्माण का परीक्षण जैली की तरह ही करें एवं आगे की प्रक्रिया जैली की तरह ही अपनायें तथा मार्मलेड तैयार पायें ।

